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India GK: कला एवं संस्कृति latest india GK: art and culture

latest india GK: art and culture

भारत में कला का अस्तित्व सभ्यता के आरम्भ से ही है।  सेंधव सभ्यता से प्राप्त मृदभांड़ों पर की गई चित्रकारी एवं मृण्मूर्तियां, मिटटी के खिलौने आदि इसके ज्वलंत उदाहरण हैं।

अजंता के कलाकारों ने लहरदार रेखाओं और सूक्ष्मग्राही रंगो में जातक कथाओं के विषय वस्तुओं (बुद्ध के विभिन्न अवतारों के जीवन के उत्तर चढ़ाव का विशद वर्णन) का चित्रण किया।  वस्तुतः भित्ति चित्रकारी भारत में काफी समय तक खूब प्रचलित रही।  चालुक्यों को बादामी, (6 ठी शताब्दी), पल्ल्वों का पनमले (7 वीं शताब्दी), पांड्यों की सित्तन्नावसल (9 वीं शताब्दी), चोलों के तंजोर (12 वीं शताब्दी), विजयनगर की लेपाक्षी (16 वीं शताब्दी) तथा विभिन्न शताब्दियों में केरल की भित्ति चित्रकारी काफी प्रचलित रही है

मुगलों के आगमन के पूर्व ही भारत में लघु चित्रकारी की एक उत्तम चित्रमय शैली स्थापित हो चुकी थी।  मुग़ल काल में चित्रकारी पर फारसी शैली व कलाकारों का प्रभाव स्पष्ट परिलक्षित होता है, किन्तु अकबर ने देशी कलाकारों को भी पर्याप्त अवसर प्रदान किया था।  अकबर ने रामायण व महाभारत जैसे महाकाव्यों के अनुवाद तैयार करने और उसे चित्रकारी से सजाने का आदेश देकर चित्रकारी के देसीकरण को गति प्रदान की थी। राजपूत शैली की चित्रकारी दे देश की महान कथाओं और आख्यानों, राम और कृष्ण की कथाओं का अंकन रेखा और रंगो के संयोग से किया गया

अजंता : भारीतय चित्रकला का उज्जवल इतिहास अजंता के भित्ति चित्रों से ही प्रारम्भ होता है।  यह महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद जिले में स्थित है।  in भित्ति चित्रों में शहर, देहात, वन, हर प्रकार के के पुरुषों, स्त्रियों, जीव जंतुओं और वनस्पति का वर्णन है।  इसके अंतर्गत २९ गुफाएं हैं और इसके अधिकतर चित्र वाकाटक, गुप्त और चालुक्य काल के हैं।

चोल कालीन चित्रकला : चोल शासकों ने भी चित्रकला की ओर काफी ध्यान दिया।  बृहदेश्वर मंदिर में बना एक चित्र बहुत आकर्षक है जिसमे भगवान शंकर बैठे हुए, दो अप्सराओं का नृत्य देख रहे हैं।  राजराज दम्पत्ति भी अपने सेवकों के साथ चित्रित हैं।

बाघ की गुफाओं के चित्र:

बाघ की गुफाएं मालवा के पास हैं।  यहाँ की गुफाओं के भित्ति चित्रों को भी गुपतकालीन माना गया है।  इनकी संख्या नो है।  इन गुफाओं में प्रकृति, मानव और पशु-पक्षियों का चित्रण बहुत भव्य है।

मुख्य भारतीय संगीत शैली के गायक :

ध्रुपद गायक : अल्लाह बन्दे खां, चन्दन चौबे, नसीरुद्दीन खां, प. राम चतुर मल्लिक़, प. सियाराम तिवारी डागर बंधू

ख्याल गायक : गुलाम अली खां, अब्दुल करीम खां, रहमत खां, प. विनायक राव पटवर्द्धन

कर्नाटक शैली के गायक : श्री निवास अय्यर, संगीत पालघाट, मल्लिकार्जुन, रामानुज आयंगर,  बाल मुरली कृष्णा, राम अवतार

हिंदुस्तानी संगीत गायक : हीराबाई बडोदकर, श्रीमती मालिनी राजुरकर, शोभा गुर्टू, प. लक्ष्मण कृष्ण राव पंडित

शास्त्रीय गायक : एस. एस. सुब्बुलक्ष्मी, विनायक राम, प. जसराज

पाण्डवानी गायक : जहन्दुराम देवागन, तीजनबाई, ऋतुवर्मा

गजल गायक :  पीनाज मसानी, बेगम अख्तर, मल्लिका पुखराज

नृत्य सम्बन्धी ग्रन्थ और उनके रचयिता:

संगीत रत्नाकर : सांरग देव

संगीतोंपनिषद्  : बाकानाचार्य

हस्तमुक्तावली : शुभंकर

भरतारनामा : तुलजाराजा

आदिभारतम : तुलजाराजा

नाट्यवेदनामा : तुलजाराजा

संगीत मकरंद : वेद

गीत गोविन्दम : जयदेव

नृत्य रत्नावली : जय सेनापति

संगीत दामोदर : रघुनाथ

बालाराम भारतम : बालाराम बर्मन

संगीत मल्लिका : मोहम्मदशाह

भारत के राज्य एवं उनके लोक नृत्य:


असम : बिहू, किलगोया, अंकियानात, बिछुवा, राखल, लीला, नटपूजा, बगुरुम्बा, चोंगवी नागानृत्य


नागालैंड : रेग्मा, रवैया लिम, युद्ध नृत्य, कुर्सी नागा, चुम्ीके, दोहाई, नुरालीप


मणिपुर : महारास, नटराज, लाइ हरोबा, वसंत रास, संखाल


मिजोरम : चेरोकान पार्खुपिला


मेघालय : बागला


मध्य प्रदेश : रीना, चोत, दिवारी, नवरानी, गोनयों, सुआ, भगोरिया, कर्मो, पाली, डागला, छेरिया, मंदिरी, गोंडा, हुल्को


महाराष्ट्र : मोनी, बोहदा, लेजम, लावणी, तमाशा, गणेश चतुर्थी, कोली, गुफा, ललित, दहिकला


बिहार : वेगा, जदुर, घुमकुड़िया, जाया, माधी, मुका, लुझरी, विदायत , कीर्तनिया, जातरा, चेकवा, डांगा, झिका, सोहराई


पश्चिम बंगाल : राम भेसे, जाया, बाउल, कीर्तन, काठी, महाल, गंभीरा, रायवेश, ढाली, मर्सिया


ओडिशा : छऊ, पैका, सवारी संचार, कुलनि,  घुमरा, गरुड़ वाहन, जदुर मदारी                    


उत्तराखंड : करमा, चांचला, छपेली, छोलिया, पांडव, भैला, झोरा, जांगर, छापरी, करन, कजरी, दीवाली


उत्तर प्रदेश : रास लीला, नौटंकी, कुमायूं, झूला, थाली, झोरा, छापरी, करन, कजरी


आंध्र प्रदेश : कुम्भी, छड़ी नृत्य, बात कम्भा, माधुरी, घंटा मर्दाला, मर्दाला, भद्रकाली


कर्नाटक : यक्षगान, कुनीता, वीरगास्से, भूतकोला, करगा


गुजरात : गणपति भजन, रासलीला, डांडिया रास, गरबा, पनिहारी नृत्य, लास्य, टिप्पणी, अकोलिया, भवई


गोवा : दकनी, खोल झगोर


राजस्थान : कठपुतली, धापाल, जिंदाद, पुगर, बागरिया, ख्याल, शक्रिया, गोयिका, लीला, झूलन लीला, कामड़, चरी, फुदी, गीदड़, पणिहारी


जम्मू कश्मीर : राउफ, भडजास, हिकात   


लक्षद्वीप : परिचाकाली


अरुणाचल प्रदेश : मुखोटा, युद्ध नृत्य


हरियाणा : भांगड़ा, डफ, सांग, धमान


पंजाब : भांगड़ा, गिद्धा, किकली


तमिलनाडु : कुम्भी, कावडी, कड़ागम, कोलाट्ट्म पित्रल कोआत्त्म


हिमाचल प्रदेश : सांगला, चम्बा, डांगी, डंडा नाव, डफ, ध्मान, जड़ा, छरवा, महाथु, छपेली


झारखंड : कर्मा, सरहुल, छाऊ


छत्तीसगढ़ : मून्दडी नृत्य


 


भारतीय सिनेमा :

एशिया में फिल्मो का प्रदर्शन पहले भारत में हुआ। आर.  जी टोनी ने एन. जि. चित्रे के साथ मिलकर १९१२ में पुण्डलिक बनाई थी, जबकि धुंडिराज गोविन्द, फाल्के ने १९१३ में राजा हरिश्चंद्र का निर्माण किया था, भारत में निर्मित पहली सवाक फ़िल्म  आलम आरा थी। जिसके निर्माता आर्देशिर ईरानी थे।  भारतीय फिल्मो में पहली महिला कलाकार दुर्गाबाई और उनकी पुत्री कमलाबाई थी जिन्होंने  १९१३ में बनी मोहिनी भस्मासुर में काम किया।

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